भाव से बड़ा कुछ नही__🌼🌼🌼
✍ एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारी जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी! नौका डगमगा रही थी। कभी चर्च नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न मिली थी !
प्राथना के लिए उसने पास्टर रख छोड़े थे, कई चर्च भी बनवाये थे, जहां वे उसके नाम से नियमित प्राथना किया करते थे लेकिन आज इस दुःख की घड़ी में कांपते हाथों वह भी चर्च गया!
सुबह जल्दी गया, ताकि प्रभु से पहली मुलाकात उसी की हो, पहली प्रार्थना वही कर सके। कोई दूसरा पहले ही मांग कर प्रभु का मन खराब न कर चुका हो! बोहनी की आदत जो होती है, कमबख्त यहां भी नहीं छूटी....सो अल्-सुबह पहुंचा चर्च ।
लेकिन यह देख कर हैरान हुआ कि गांव का एक भिखारी उससे पहले से ही चर्च में मौजूद था। अंधेरा था, वह भी पीछे खड़ा हो गया, कि भिखारी क्या मांग रहा है ? धनी आदमी सोचता है, कि मेरे पास तो मुसीबतें हैं; भिखारी के पास क्या मुसीबतें हो सकती हैं ?
और भिखारी सोचता है, कि मुसीबतें मेरे पास हैं। धनी आदमी के पास क्या मुसीबतें होंगी? एक भिखारी की मुसीबत दूसरे भिखारी के लिए बहुत बड़ी न थी !
उसने सुना, कि भिखारी कह रहा है --हे प्रिय यीशु मसीह ! अगर पांच रुपए आज न मिलें तो जीवन नष्ट हो जाएगा। आत्महत्या कर लूंगा। पत्नी बीमार है और दवा के लिए पांच रुपए होना बिलकुल आवश्यक हैं ! मेरा जीवन संकट में है !
अमीर आदमी ने यह सुना और वह भिखारी बंद ही नहीं हो रहा है; कहे जा रहा है और प्रार्थना जारी है ! तो उसने झल्लाकर अपने खीसे से पांच रुपए निकाल कर उस भिखारी को दिए और कहा - जा ये ले जा पांच रुपए, तू ले और जा जल्दी यहां से !
अब वह प्रभु से मुखतिब हुआ और बोला -- प्रभु, अब आप ध्यान मेरी तरफ दें, इस भिखारी की तो यही आदत है। दरअसल मुझे पांच करोड़ रुपए की जरूरत है !”
प्रभु यशु मुस्करा उठे बोले -- एक छोटे भिखारी से तो तूने मुझे छुटकारा दिला दिया, लेकिन तुझसे छुटकारा पाने के लिए तो मुझको तुमसे भी बढा भिखारी ढूंढना पड़ेगा ! तुम सब लोग यहां कुछ न कुछ मांगने ही आते हो, कभी मेरी जरूरत का भी ख्याल आया है?
धनी आश्चर्यचकित हुआ बोला - प्रभु आपको क्या चाहिए?
प्रभु यशु मसीह बोले - प्रेम ! मैं भाव का भूखा हूँ । मुझे निस्वार्थ प्रेम व समर्पित भक्त प्रिय है ! कभी इस भाव से मुझ तक आओ; फिर तुम्हे कुछ मांगने की आवश्यकता ही नही पड़ेगी !!
जय मसीह की
✍ एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारी जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी! नौका डगमगा रही थी। कभी चर्च नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न मिली थी !
प्राथना के लिए उसने पास्टर रख छोड़े थे, कई चर्च भी बनवाये थे, जहां वे उसके नाम से नियमित प्राथना किया करते थे लेकिन आज इस दुःख की घड़ी में कांपते हाथों वह भी चर्च गया!
सुबह जल्दी गया, ताकि प्रभु से पहली मुलाकात उसी की हो, पहली प्रार्थना वही कर सके। कोई दूसरा पहले ही मांग कर प्रभु का मन खराब न कर चुका हो! बोहनी की आदत जो होती है, कमबख्त यहां भी नहीं छूटी....सो अल्-सुबह पहुंचा चर्च ।
लेकिन यह देख कर हैरान हुआ कि गांव का एक भिखारी उससे पहले से ही चर्च में मौजूद था। अंधेरा था, वह भी पीछे खड़ा हो गया, कि भिखारी क्या मांग रहा है ? धनी आदमी सोचता है, कि मेरे पास तो मुसीबतें हैं; भिखारी के पास क्या मुसीबतें हो सकती हैं ?
और भिखारी सोचता है, कि मुसीबतें मेरे पास हैं। धनी आदमी के पास क्या मुसीबतें होंगी? एक भिखारी की मुसीबत दूसरे भिखारी के लिए बहुत बड़ी न थी !
उसने सुना, कि भिखारी कह रहा है --हे प्रिय यीशु मसीह ! अगर पांच रुपए आज न मिलें तो जीवन नष्ट हो जाएगा। आत्महत्या कर लूंगा। पत्नी बीमार है और दवा के लिए पांच रुपए होना बिलकुल आवश्यक हैं ! मेरा जीवन संकट में है !
अमीर आदमी ने यह सुना और वह भिखारी बंद ही नहीं हो रहा है; कहे जा रहा है और प्रार्थना जारी है ! तो उसने झल्लाकर अपने खीसे से पांच रुपए निकाल कर उस भिखारी को दिए और कहा - जा ये ले जा पांच रुपए, तू ले और जा जल्दी यहां से !
अब वह प्रभु से मुखतिब हुआ और बोला -- प्रभु, अब आप ध्यान मेरी तरफ दें, इस भिखारी की तो यही आदत है। दरअसल मुझे पांच करोड़ रुपए की जरूरत है !”
प्रभु यशु मुस्करा उठे बोले -- एक छोटे भिखारी से तो तूने मुझे छुटकारा दिला दिया, लेकिन तुझसे छुटकारा पाने के लिए तो मुझको तुमसे भी बढा भिखारी ढूंढना पड़ेगा ! तुम सब लोग यहां कुछ न कुछ मांगने ही आते हो, कभी मेरी जरूरत का भी ख्याल आया है?
धनी आश्चर्यचकित हुआ बोला - प्रभु आपको क्या चाहिए?
प्रभु यशु मसीह बोले - प्रेम ! मैं भाव का भूखा हूँ । मुझे निस्वार्थ प्रेम व समर्पित भक्त प्रिय है ! कभी इस भाव से मुझ तक आओ; फिर तुम्हे कुछ मांगने की आवश्यकता ही नही पड़ेगी !!
जय मसीह की
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