Tuesday, November 13, 2018

आने वाली पीढ़ी को देने के लिए हमारे पास क्या है?

अब्राहम को संतान की नहीं; अपने विश्वास; आज्ञाकारिता और समर्पण के वारिस की ज़रूरत थी|कलाम में लिखा है कि अब्राहम सोने और रूपे का धनी था|परन्तु उससे भी कहीं अधिक वह आत्मिक रूप से धनी था|उसके पास इज़हाक को विरासत में देने के लिए विश्वास की अपार दौलत थी| उसने इज़हाक को समर्पण और आज्ञाकारिता का पाठ; उसके ही बलिदान के द्वारा सिखाया|इज़हाक के दिल ओ दिमाग़ पर उस घटना ने; एक अमित छाप छोड़ी थी| वो घटना भयानक अवश्य थी; कि एक पिता अपने ही हांथों से, अपने एकलौते बेटे को बलिदान करने के लिये दृढ़ संकल्प था|मैं सोचता हूँ अब्राहम के इस व्यवहार ने इज़हाक पर एक ऐसा प्रभाव छोड़ा; जो मिटाए नहीं मिट सकता था| इस घटना ने इज़हाक को अवश्य ही सोचने पर मज़बूर किया होगा; कि विश्वास की कोई सीमा नहीं हो सकती|उसने विश्वास का पाठ; बलि की वेदी पर सीखा| उस घटना का यह एक सकारात्मक पहलू था|बिना कहे ही, जैसे अब्राहम ने इज़हाक से कहा; विश्वास करो तो मेरी तरह करना|आज्ञाकारी बनो तो मेरे जैसे बनना|अब्राहम के परिवार में जन्म लेना कोई साधारण बात नहीं थी; क्योंकि अब्राहम असाधारण व्यक्ति था| यदि अब्राहम के पास इज़हाक को  देने के लिए अपार  संसार धन संपत्ति थी; तो दूसरी ओर उसके पास अटूट विश्वास भी था|इज़हाक के पास याकूब को बताने और समझाने के लिए किस्से कहानियां नहीं थीं; मगर एक व्यक्तिगत अनुभव था| अब्राहम के पास आने वाली पीढ़ी को देने के लिए; अटूट विशवास था; समर्पण और आज्ञाकारिता थी|भजन 71:18 में लिखा है---हे ख़ुदा जब मैं बूढ़ा हो जाऊं और मेरे बाल पाक जाएँ, तब भी तू मुझे न छोड़; जब तक मैं आने वाली पीढ़ी के लोगों को तेरा बाहू बल और सब उत्पन्न होने वालों को तेरा पराक्रम सुनाऊँ|

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